निर्विघ्न संपन्न…अखंड पूजन..ओर नमाज

धार। शुक्रवार को बसंत पंचमी पर भोजशाला में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन कराते हुए प्रशासन ने निर्भीक मां सरस्वती का अखंड हवन पूजन व भोजशाल परिधि में  नियत किए गए स्थान पर नमाज करवा कर चैन की सांस ली ही थी कि….अचानक ऐसा क्या हुआ कि शनिवार को मुस्लिम समाज के सदर अब्दुल समद ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर शुक्रवार को की गई नमाज को डमी बताते हुए पूरा दोष प्रशासन के माथे मढ़ दिया ।

क्या बोले ….सदर अब्दुल समद….!

इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने कहा कि प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं करवाते हुए नमाज भोजशाला परिधि में  नियत किए गए स्थान पर नहीं पढ़ाई परिधि के बाहर करवाई गई । जहां नमाज करवाई वह स्थान परिधि में ही नहीं आता । उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिन व्यक्तियों से नमाज पढ़वाई गई वह बाहरी व्यक्ति थे । साथ ही उन्होंने नाम नहीं बताते हुए यह भी कहा कि राजनीतिक लाभ के चक्कर में हमारे कोम के ही व्यक्ति ने कुछ लोगों को नमाज पढ़ने भेजा था। हमने कोम के व्यक्तियों से आग्रह किया था कि शहर की शांति व्यवस्था के लिए वहां नमाज पढ़ने नहीं जाना है कुछ ही सीमित व्यक्तियों को जाना है ।

उठ रहे….सवाल ….?

अब सवाल यह उठ रहे हैं कि क्या प्रशासन ने नमाज पढ़ने से किसी व्यक्ति को रोका…? 17 व्यक्तियों ने नमाज पढ़ी क्या वे मुस्लिम नहीं थे…? क्या जिन लोगों ने नमाज पढ़ी उन्हें भोजशाला परिधि में नियत किए गए स्थान का ज्ञान नहीं था..? अगर वे मुस्लिम थे उन्होंने नमाज पढ़ी तो फिर सवाल क्यों…?
गुलमोहर कॉलोनी में लगाए गए नारे “कोम के गद्दारों को”.. इससे तो यह भी साफ है कि मुस्लिम समाज के व्यक्तियों ने ही  नियत किए गए स्थान पर परिधि में नमाज पड़ी फिर उनपर आरोप कैसा ? वे भी तो हजारों लोगों की भीड़ में पुलिस सुरक्षा में आए होंगे ? ऐसे कई सवाल उठ रहे हैं…

यार ने हीं लूट लिया………..!

इधर शहर की गुलमोहर कॉलोनी में लगे नारे “कोम के गद्दारों को”.. ओर महिलाओं के बयानों से ऐसा लग रहा था समाज के लोग अपने ही व्यक्तियों से समाज में व्याप्त गुटबाजी के कारण ठगे गए हैं और दोष प्रशासन पर मढ़ रहे हैं। पर इस शहर के अमन चैन के लिए अगर निजता से ऊपर उठकर एक कदम आगे बढ़कर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के सम्मान में पुलिस सुरक्षा में नियत किए गए स्थान मे जाकर नमाज पढ़ भी ली तो क्या हुआ । इसी शहर के तहसील के जिले के देश के नागरिकता प्राप्त नागरिक ही तो होंगे…? ऐसा तो प्रशासन के साथ कोई कमिटमेंट नहीं हुआ होगा कि शहर का व्यक्ति या किसी वार्ड का व्यक्ति ही पढ़ेगा और ना ही सुप्रीम कोर्ट के ऐसे आदेश होंगे …? अगर शहर में जरा सी भी कोई घटना दुर्घटना हो जाती तो खामियांजा तो पूरे शहर को ही भोगना होता है जिसमें हर वर्ग के लोग होते हैं ।

वैसे भी यहां ना दरिया…ना कश्ती है……बैठ ही गए तो किनारो से मतलब….!

जिला प्रशासन ने तो केवट की भूमिका निभाते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कराते हुए पार लगा ही दिया….फिर पार लगाने वाला प्रशासन…..दोषी क्यों… ? ओर फिर दिन रात मेहनत कर रहे जिला प्रशासन के साथ 8000 जवान व तमाम आईपीएस रेंज के अधिकारी जिसके कारण ये शहर चैन की निंद सोता रहा …उनका भी परंपरा अनुसार सहभोज हुआ जहां जमकर जश्न मनाते हुए थिरके ये जाबाज । शहर में अमन चैन कायम रखने के लिए सभी समुदाय के लोगों ने जिला प्रशासन का आभार मानते हुए सोशल मीडिया पर बधाई दी…..

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