Dhar । आयुर्वेद को देश की राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति घोषित करवाने हेतु विश्व आयुर्वेद परिषद की धार शाखा ने महामहिम राष्ट्रपति एवं माननीय प्रधानमंत्री जी के नाम जिलाधीश महोदय को ज्ञापन सौंपा। विश्व आयुर्वेद परिषद के माध्यम से आयुर्वेद को राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति घोषित करवाने हेतु राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया जा रहा है। ज्ञापन में डॉ. शरद विजयवर्गीय, डॉ. रमाकांत मुकुट, डॉ रवींद्र चतुर्वेदी, डॉ रमेश चंद्र मुवेल, डॉ अतुल तोमर, डॉ. अभिषेक वैद्य, डॉ. दिनेश कर्मा, डॉ. रत्नेश निगम, डॉ. अतुल राठौड़, डॉ योगेंद्र चंद्रा, डॉ अशोक मंडलोई, डॉ आकाश मावी इत्यादि आयुर्वेद चिकित्सक उपस्थित थे।

ज्ञापनके माध्यम से बताया कि विश्व आयुर्वेद परिषद राष्ट्रोत्थान को केंद्र में रखकर स्व-जागरण के प्रति दृढ़ एवं आयुर्वेद के समग्र उत्थान के प्रति कृतसंकल्पित स्वयंसेवी संगठन है, जो विगत 29 वर्षों से आयुर्वेद उत्थान हेतु सतत सक्रिय है। स्वतंत्रता प्राप्ति के 80 वर्ष व्यतीत होने के पश्चात् भी भारतीय सनातन स्व में से एक “आयुर्वेद” भारत की मूल राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति के स्थान पर अभी तक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति तक ही सीमित है, जो वेदना का विषय है। आयुर्वेद केवल चिकित्सा विज्ञान ही नहीं अपितु जीवन का विज्ञान है, आयुर्वेद के मनिषियों ने अपने-अपने ज्ञान्, तथ्य एवं अनुसंधान तथा तर्क के आधार पर साक्ष्य-सिद्ध किया है। अतएव आयुर्वेद सनातन सिद्ध चिकित्सा सहित जीवन का विज्ञान है। अपने राष्ट्र में राष्ट्र ध्वज. राष्ट्र-गीत, राष्ट्र-गान्, राष्ट्र-भाषा, राष्ट्रीय पशु/पक्षी है. ऐसी स्थिति में विश्व के इस पुरातन एवं सनातन राष्ट्र की अपनी राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति भी अवश्यमेव होनी चाहिए, जो आयुर्वेद ही है।

वर्तमान वैद्य गण भी आयुर्वेद के प्राचीन ज्ञान को नवीनता के मानक के साथ ही नित्य अनुसंधान प्रक्रिया के माध्यम से चिकित्सा पद्धति को साक्ष्य आधारित चिकित्सा पद्धति सिद्ध करने के मार्ग में प्राण-प्रण से संक्रिय हैं। फिर भी विश्व के पुराने राष्ट्र में, विश्व की सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धति किंवा जीवन पद्धति, वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति का दंश झेलने को विवश है।

अतएय विश्व आयुर्वेद परिषद भारत के महामहिम राष्ट्रपति जी एवं माननीय प्रधानमंत्री जी से निवेदन पूर्वक मांग करता है कि आयुर्वेद चिकित्सा को सुदृढ़ एवं तकनीकी संसाधनों से युक्त व्यवस्था प्राथमिक चिकित्सा केंद्र से लेकर चिकित्सा के उच्चतम संस्थानों तक में “पुरानी नींव, नया निर्माण के आधार पर विकसित करने की कृपा करते हुये आयुर्वेद को भारत की मूल राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति घोषित करने की कृपा की जाये, जो भारत के “स्व जागरण” के मार्ग में एक मील का पत्थर सिद्ध होगा, उक्त के लिये विश्व आयुर्वेद परिषद् सहित सम्पूर्ण आयुर्वेद जगत, एवं भारत वर्ष भवदीय का कृतज्ञ होगा।

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