
वृद्धाश्रम के बुजुर्गों ने की…. गणेश प्रतिमाएं तैयार
धार I गणेश जी स्थापना का महत्वपूर्ण पर्व गणेश चतुर्थी दस्तक दे रहा है। आस्था व प्रथम पूज्य का आगमन बहुत सुखदाई आनंद का प्रतीक है। आजकल यह पर्व लोकचेतना और जागरूकता का पर्व बनता जा रहा है। प्लास्टर आफ पैरिस के स्थान पर माटी के गणेश जी की मूर्ति का प्रचलन व महत्व बढ़ा है। श्रद्धालय वृद्धाश्रम के बुजुर्गों ने इस वर्ष गणेशोत्सव के अवसर पर गाय के गोबर और प्राकृतिक सामग्री से आकर्षक एवं पर्यावरण अनुकूल भगवान गणेश की प्रतिमाएं तैयार की हैं। इन प्रतिमाओं का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ बुजुर्गों को आत्मनिर्भर बनाना और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाना है। इन प्रतिमाओं को घर पर गमले या जल स्थल पर विसर्जित किया जा सकेगा।
आश्रम के बुजुर्गों ने पूरे उत्साह और मेहनत से इन प्रतिमाओं का श्रंगार किया है। वृद्धजन इस पहल को पर्यावरण हित एवं आत्मसम्मान का अवसर मानते है। वे चाहते हैं कि अधिक से अधिक लोग इस वर्ष माटी व गाय गोबर से बनी इन विशेष गणेश प्रतिमाओं को घर में स्थापित करे।
आश्रम प्रबंधन ने लोगों से अपील की है कि वे प्लास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमाओं के बजाय गोबर से बनी पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं खरीदकर बुजुर्गों का मनोबल बढ़ाएं और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में सहयोग करें। पर्यावरण व जल संरचनाओं को ज्यादा दूषित होने से बचाए।
यहां रहेगी.. प्रतिमाएं उपलब्ध
ये प्रतिमाएं श्रद्धालय वृद्धाश्रम, भोज उद्यान व लाल बाग विक्रम ज्ञान मन्दिर परिसर में उपलब्ध होगी।
प्रतिमाएं तैयार करते वृद्धजन
