सनातन प्रहरी से बड़ रही तकरार ….

सुरेश प्रजापति की कलम से….

धार। जैसेही भोजशाला को लेकर हाई कोर्ट का फैसला आया धार सहित पूरे जिले में जश्न मनाया गया खूब मिठाइयां बांटी गई आम जनता को भी लग रहा था कि जो धार संवेदनशील माना जाता था। जहां बाहर के लोग अपनी बेटी के संबंध करने में भी कतराते थे अब वही धार विकास की एक नई इबारत लिखेगा । पर ऐसा होता नहीं दिख रहा है …….यहां तो कभी नमाज को लेकर ..तो कभी सर्वे नंबरों को लेकर ..ज्ञापन बाजी तो कभी वराह मार्च की अनुमति को लेकर असमंजस की स्थिति बनती ही जा रही है । हालांकि अभी तक तो प्रशासन ने अपनी पूरी सूझबूझ के साथ यहां की फ़िज़ा को बिगडने नहीं दिया है और ना ही आगे भी ऐसा होने देगा ..ऐसी जनता को उम्मीद है । पर होगा वही जो राम रचि राखा…

आए तो थे विकास को एक नया आयाम देने …. पर कभी नमाज तो कभी वराह मार्च में उलझ गए….

जैसे ही धार के कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने पदभार ग्रहण किया था … आम जनता को बड़ी उम्मीद थी कि यह श्रीमान धार के विकास को एक नया आयाम देंगे… और इन्होंने भी एक इंटरव्यू में विकास को लेकर बड़ी बात कही थी…. पर क्या मालूम था कि यह धार है… यहां की फ़िज़ा के रंग मे अमन चैन बनाए रखना ही विकास का पहला पायदान है। इस बात को बाहर के ठेकेदार अच्छे से समझते हैं.. इसलिए वे भी मेडिकल कॉलेज को कछुआ चाल से ही करने मे लगे हैं …..जिसके कारण वरिष्ठ अधिकारियों की नाराजगी यहां के लोकल प्रशासन को झेलना पड़ती है खेर ठीक है ये धार है विकास तो होता रहेगा ….!

15 सितंबर बनी चुनौती…….

हाल फिलहाल तो 15 सितंबर प्रशासन के लिए एक चुनौती है… जिसे स्वीकारना होगा….? क्योंकि जिस तरह से सोशल मीडिया पर प्रचार प्रसार हुआ है… और सनातन प्रहरी समिति वा प्रशासन के बीच जो तकरार बढ़ती जा रही है वह आम जनता से छुपी नहीं है । जिससे शहर में आम जनता के बीच असमंजस की स्थिति तो है ही । पर शासन ने 15 सितंबर को वराह मार्च की अनुमति निरस्त करते हुए साफ चेतावनी दी है कि धार मे धारा 163 लागू है.. बिना अनुमति कोई भी एकत्रीकरण की कार्यवाही नहीं कर सकता है । उधर समिति का कहना था कि हमने अनुमति मांगी ही नहीं हमने तो सूचना दी है पर जो भी हो फिलहाल प्रशासन ने शहर मे लगे वराह मार्च के साथ सभी फ्लेक्स बोर्ड हटा दिए हैं। इससे फ्लेक्स का व्यवसाय करने वाले प्रिंटिंग प्रेस वालों पर भी संकट हाल फिलहाल तो गहरा गया है क्योंकि साल में कुछ ही महीने त्योहार के होते हैं जिसमें फ्लेक्स का व्यवसाय चलता है । और वह अपने परिवार जीवन यापन करते हैं..इधर इन परिस्थितियों को लेकर अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति जो रोज कमाते खाते हैं की चिंता दिन पर दिन बढ़ती जा रही है । क्योंकि यहां का आम व्यक्ति किसीभी हाल में शांति ही चाहता है ।

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